॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.15.35
नैतच्चित्रं भगवति ह्यनन्ते जगदीश्वरे।
ओतप्रोतमिदं यस्मिंस्तन्तुष्वंग यथा पटः॥ ३५
naitaccitraṃ bhagavati hyanante jagadīśvare|
otaprotamidaṃ yasmiṃstantuṣvaṃga yathā paṭaḥ|| 35
अर्थ
भगवान् बलराम स्वयं जगदीश्वर हैं। उनमें यह सारा संसार ठीक वैसे ही ओतप्रोत है, जैसे सूतोंमें वस्त्र। तब भला, उनके लिये यह कौन आश्चर्यकी बात है॥ ३५॥