श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.14.57

दशम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

सर्वेषामपि वस्तूनां भावार्थो भवति स्थितः।

तस्यापि भगवान् कृष्णः किमतद् वस्तु रूप्यताम्॥ ५७

sarveṣāmapi vastūnāṃ bhāvārtho bhavati sthitaḥ|

tasyāpi bhagavān kṛṣṇaḥ kimatad vastu rūpyatām|| 57

अर्थ

सभी वस्तुओंका अन्तिम रूप अपने कारणमें स्थित होता है। उस कारणके भी परम कारण हैं भगवान् श्रीकृष्ण। तब भला बताओ, किस वस्तुको श्रीकृष्णसे भिन्‍न बतलायें॥ ५७॥

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