श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.14.54

दशम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तस्मात् प्रियतमः स्वात्मा सर्वेषामपि देहिनाम्।

तदर्थमेव सकलं जगदेतच्चराचरम्॥ ५४

tasmāt priyatamaḥ svātmā sarveṣāmapi dehinām|

tadarthameva sakalaṃ jagadetaccarācaram|| 54

अर्थ

इससे यह बात सिद्ध होती है कि सभी प्राणी अपने आत्मासे ही सबसे बढ़कर प्रेम करते हैं और उसीके लिये इस सारे चराचर जगत‍्से भी प्रेम करते हैं॥ ५४॥

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