श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.14.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ततो हसन् हृषीकेशोऽभ्यवहृत्य सहार्भकैः।

दर्शयंश्‍चर्माजगरं न्यवर्तत वनाद् व्रजम्॥ ४६

tato hasan hṛṣīkeśo'bhyavahṛtya sahārbhakaiḥ|

darśayaṃścarmājagaraṃ nyavartata vanād vrajam|| 46

अर्थ

तब हँसते हुए भगवान्‌ने ग्वालबालोंके साथ भोजन किया और उन्हें अघासुरके शरीरका ढाँचा दिखाते हुए वनसे व्रजमें लौट आये॥ ४६॥✎ 1423

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1423 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): महकते → महँकते

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