तब हँसते हुए भगवान्ने ग्वालबालोंके साथ भोजन किया और उन्हें अघासुरके शरीरका ढाँचा दिखाते हुए वनसे व्रजमें लौट आये॥ ४६॥✎ 1423
ततो हसन् हृषीकेशोऽभ्यवहृत्य सहार्भकैः।
दर्शयंश्चर्माजगरं न्यवर्तत वनाद् व्रजम्॥ ४६
तब हँसते हुए भगवान्ने ग्वालबालोंके साथ भोजन किया और उन्हें अघासुरके शरीरका ढाँचा दिखाते हुए वनसे व्रजमें लौट आये॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.14.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 229) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/14/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1423 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): महकते → महँकते