श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.14.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

जगत्त्रयान्तोदधिसम्प्लवोदे

नारायणस्योदरनाभिनालात् ।

विनिर्गतोऽजस्त्विति वाङ् न वै मृषा

किं त्वीश्‍वर त्वन्‍न विनिर्गतोऽस्मि॥ १३

jagattrayāntodadhisamplavode

nārāyaṇasyodaranābhinālāt |

vinirgato'jastviti vāṅ na vai mṛṣā

kiṃ tvīśvara tvanna vinirgato'smi|| 13

अर्थ

श्रुतियाँ कहती हैं कि जिस समय तीनों लोक प्रलयकालीन जलमें लीन थे, उस समय उस जलमें स्थित श्रीनारायणके नाभिकमलसे ब्रह्माका जन्म हुआ। उनका यह कहना किसी प्रकार असत्य नहीं हो सकता। तब आप ही बतलाइये, प्रभो! क्या मैं आपका पुत्र नहीं हूँ?॥ १३॥✎ 1421

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