श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

केचित् पुष्पैर्दलैः केचित् पल्लवैरंकुरैः फलैः।

शिग्भिस्त्वग्भिर्दृषद्भिश्‍च बुभुजुः कृतभाजनाः॥ ९

kecit puṣpairdalaiḥ kecit pallavairaṃkuraiḥ phalaiḥ|

śigbhistvagbhirdṛṣadbhiśca bubhujuḥ kṛtabhājanāḥ|| 9

अर्थ

कोई पुष्प तो कोई पत्ते और कोई-कोई पल्लव, अंकुर, फल, छीके, छाल एवं पत्थरोंके पात्र बनाकर भोजन करने लगे॥ ९॥✎ 1417 1418 2067

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1417 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,
  • #1418 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके → छीके
  • #2067 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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