श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.55

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

एवं सकृद् ददर्शाजः परब्रह्मात्मनोऽखिलान्।

यस्य भासा सर्वमिदं विभाति सचराचरम्॥ ५५

evaṃ sakṛd dadarśājaḥ parabrahmātmano'khilān|

yasya bhāsā sarvamidaṃ vibhāti sacarācaram|| 55

अर्थ

इस प्रकार ब्रह्माजीने एक साथ ही देखा कि वे सब-के-सब उन परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्णके ही स्वरूप हैं, जिनके प्रकाशसे यह सारा चराचर जगत् प्रकाशित हो रहा है॥ ५५॥✎ 1925

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1925 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): एक-रस → एकरस

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