इस प्रकार ब्रह्माजीने एक साथ ही देखा कि वे सब-के-सब उन परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्णके ही स्वरूप हैं, जिनके प्रकाशसे यह सारा चराचर जगत् प्रकाशित हो रहा है॥ ५५॥✎ 1925
एवं सकृद् ददर्शाजः परब्रह्मात्मनोऽखिलान्।
यस्य भासा सर्वमिदं विभाति सचराचरम्॥ ५५
इस प्रकार ब्रह्माजीने एक साथ ही देखा कि वे सब-के-सब उन परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्णके ही स्वरूप हैं, जिनके प्रकाशसे यह सारा चराचर जगत् प्रकाशित हो रहा है॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 218) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1925 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): एक-रस → एकरस