श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

कृष्णवत्सैरसंख्यातैर्यूथीकृत्य स्ववत्सकान्।

चारयन्तोऽर्भलीलाभिर्विजह्रुस्तत्र तत्र ह॥ ३

kṛṣṇavatsairasaṃkhyātairyūthīkṛtya svavatsakān|

cārayanto'rbhalīlābhirvijahrustatra tatra ha|| 3

अर्थ

उन्होंने श्रीकृष्णके अगणित बछड़ोंमें अपने-अपने बछड़े मिला दिये और स्थान-स्थानपर बालोचित खेल खेलते हुए विचरने लगे॥ ३॥✎ 1414 1415

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1414 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींका → छीका
  • #1415 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,

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