उन्होंने श्रीकृष्णके अगणित बछड़ोंमें अपने-अपने बछड़े मिला दिये और स्थान-स्थानपर बालोचित खेल खेलते हुए विचरने लगे॥ ३॥✎ 14141415
कृष्णवत्सैरसंख्यातैर्यूथीकृत्य स्ववत्सकान्।
चारयन्तोऽर्भलीलाभिर्विजह्रुस्तत्र तत्र ह॥ ३
उन्होंने श्रीकृष्णके अगणित बछड़ोंमें अपने-अपने बछड़े मिला दिये और स्थान-स्थानपर बालोचित खेल खेलते हुए विचरने लगे॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 203) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/12/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)