श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.58

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

इति नन्दादयो गोपाः कृष्णरामकथां मुदा।

कुर्वन्तो रममाणाश्‍च नाविन्दन् भववेदनाम्॥ ५८

iti nandādayo gopāḥ kṛṣṇarāmakathāṃ mudā|

kurvanto ramamāṇāśca nāvindan bhavavedanām|| 58

अर्थ

नन्दबाबा आदि गोपगण इसी प्रकार बड़े आनन्दसे अपने श्याम और रामकी बातें किया करते। वे उनमें इतने तन्मय रहते कि उन्हें संसारके दुःख-संकटोंका कुछ पता ही न चलता॥ ५८॥

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