॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.57
अहो ब्रह्मविदां वाचो नासत्याः सन्ति कर्हिचित्।
गर्गो यदाह भगवानन्वभावि तथैव तत्॥ ५७
aho brahmavidāṃ vāco nāsatyāḥ santi karhicit|
gargo yadāha bhagavānanvabhāvi tathaiva tat|| 57
अर्थ
सच है, ब्रह्मवेत्ता महात्माओंके वचन कभी झूठे नहीं होते। देखो न, महात्मा गर्गाचार्यने जितनी बातें कही थीं, सब-की-सब सोलहों आने ठीक उतर रही हैं’॥ ५७॥