श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.57

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अहो ब्रह्मविदां वाचो नासत्याः सन्ति कर्हिचित्।

गर्गो यदाह भगवानन्वभावि तथैव तत्॥ ५७

aho brahmavidāṃ vāco nāsatyāḥ santi karhicit|

gargo yadāha bhagavānanvabhāvi tathaiva tat|| 57

अर्थ

सच है, ब्रह्मवेत्ता महात्माओंके वचन कभी झूठे नहीं होते। देखो न, महात्मा गर्गाचार्यने जितनी बातें कही थीं, सब-की-सब सोलहों आने ठीक उतर रही हैं’॥ ५७॥

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