॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.52
तदा बकारिं सुरलोकवासिनः
समाकिरन् नन्दनमल्लिकादिभिः।
समीडिरे चानकशंखसंस्तवै-
स्तद् वीक्ष्य गोपालसुता विसिस्मिरे॥ ५२
tadā bakāriṃ suralokavāsinaḥ
samākiran nandanamallikādibhiḥ|
samīḍire cānakaśaṃkhasaṃstavai-
stad vīkṣya gopālasutā visismire|| 52
अर्थ
सभी देवता भगवान् श्रीकृष्णपर नन्दनवनके बेला, चमेली आदिके फूल बरसाने लगे तथा नगारे, शंख आदि बजाकर एवं स्तोत्रोंके द्वारा उनको प्रसन्न करने लगे। यह सब देखकर सब-के-सब ग्वालबाल आश्चर्यचकित हो गये॥ ५२॥