श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

मुक्तः कथंचिद् राक्षस्या बालघ्न्या बालको ह्यसौ।

हरेरनुग्रहान्‍नूनमनश्‍चोपरि नापतत्॥ २४

muktaḥ kathaṃcid rākṣasyā bālaghnyā bālako hyasau|

hareranugrahānnūnamanaścopari nāpatat|| 24

अर्थ

देखो, यह सामने बैठा हुआ नन्दरायका लाड़ला सबसे पहले तो बच्चोंके लिये कालस्वरूपिणी हत्यारी पूतनाके चंगुलसे किसी प्रकार छूटा। इसके बाद भगवान्‌की दूसरी कृपा यह हुई कि इसके ऊपर उतना बड़ा छकड़ा गिरते गिरते बचा॥ २४॥

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