श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

गोपवृद्धा महोत्पाताननुभूय बृहद्वने।

नन्दादयः समागम्य व्रजकार्यममन्त्रयन्॥ २१

gopavṛddhā mahotpātānanubhūya bṛhadvane|

nandādayaḥ samāgamya vrajakāryamamantrayan|| 21

अर्थ

जब नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने देखा कि महावनमें तो बड़े-बड़े उत्पात होने लगे हैं, तब वे लोग इकट्ठे होकर ‘अब व्रजवासियोंको क्या करना चाहिये’—इस विषयपर विचार करने लगे॥ २१॥

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