॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.1.48
मृत्युर्बुद्धिमतापोह्यो यावद्बुद्धिबलोदयम्।
यद्यसौ न निवर्तेत नापराधोऽस्ति देहिनः॥ ४८
mṛtyurbuddhimatāpohyo yāvadbuddhibalodayam|
yadyasau na nivarteta nāparādho'sti dehinaḥ|| 48
अर्थ
‘बुद्धिमान् पुरुषको, जहाँतक उसकी बुद्धि और बल साथ दें, मृत्युको टालनेका प्रयत्न करना चाहिये। प्रयत्न करनेपर भी वह न टल सके, तो फिर प्रयत्न करनेवालेका कोई दोष नहीं रहता॥ ४८॥