जिस प्रकार बादल वायुके वशमें रहते हैं, वैसे ही लोकपालोंके सहित सारा संसार कालभगवान्के अधीन है। मैं समझता हूँ कि तुमलोगोंके जीवनमें ये जो अप्रिय घटनाएँ घटित हुई हैं, वे सब उन्हींकी लीला हैं॥ १४॥✎ 1575
सर्वं कालकृतं मन्ये भवतां च यदप्रियम्।
सपालो यद्वशे लोको वायोरिव घनावलिः॥ १४
जिस प्रकार बादल वायुके वशमें रहते हैं, वैसे ही लोकपालोंके सहित सारा संसार कालभगवान्के अधीन है। मैं समझता हूँ कि तुमलोगोंके जीवनमें ये जो अप्रिय घटनाएँ घटित हुई हैं, वे सब उन्हींकी लीला हैं॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.9.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 120) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/9/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)