श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.5

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

साधयित्वाजातशत्रोः स्वं राज्यं कितवैर्हृतम्।

घातयित्वासतो राज्ञः कचस्पर्शक्षतायुषः॥ ५

sādhayitvājātaśatroḥ svaṃ rājyaṃ kitavairhṛtam|

ghātayitvāsato rājñaḥ kacasparśakṣatāyuṣaḥ|| 5

अर्थ

इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णने अजातशत्रु महाराज युधिष्ठिरको उनका वह राज्य, जो धूर्तोंने छलसे छीन लिया था, वापस दिलाया तथा द्रौपदीके केशोंका स्पर्श करनेसे जिनकी आयु क्षीण हो गयी थी, उन दुष्ट राजाओंका वध कराया॥ ५॥

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