इन अनर्थोंकी शान्तिका साक्षात् साधन है—केवल भगवान्का भक्तियोग। परन्तु संसारके लोग इस बातको नहीं जानते। यही समझकर उन्होंने इस परमहंसोंकी संहिता श्रीमद्भागवतकी रचना की॥ ६॥✎ 1573
अनर्थोपशमं साक्षाद्भक्तियोगमधोक्षजे।
लोकस्याजानतो विद्वांश्चक्रे सात्वतसंहिताम्॥ ६
इन अनर्थोंकी शान्तिका साक्षात् साधन है—केवल भगवान्का भक्तियोग। परन्तु संसारके लोग इस बातको नहीं जानते। यही समझकर उन्होंने इस परमहंसोंकी संहिता श्रीमद्भागवतकी रचना की॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 107) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)