श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.56

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

विमुच्य रशनाबद्धं बालहत्याहतप्रभम्।

तेजसा मणिना हीनं शिबिरान्‍निरयापयत्॥ ५६

vimucya raśanābaddhaṃ bālahatyāhataprabham|

tejasā maṇinā hīnaṃ śibirānnirayāpayat|| 56

अर्थ

बालकोंकी हत्या करनेसे वह श्रीहीन तो पहले ही हो गया था, अब मणि और ब्रह्मतेजसे भी रहित हो गया। इसके बाद उन्होंने रस्सीका बन्धन खोलकर उसे शिविरसे निकाल दिया॥ ५६॥

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