बालकोंकी हत्या करनेसे वह श्रीहीन तो पहले ही हो गया था, अब मणि और ब्रह्मतेजसे भी रहित हो गया। इसके बाद उन्होंने रस्सीका बन्धन खोलकर उसे शिविरसे निकाल दिया॥ ५६॥
विमुच्य रशनाबद्धं बालहत्याहतप्रभम्।
तेजसा मणिना हीनं शिबिरान्निरयापयत्॥ ५६
बालकोंकी हत्या करनेसे वह श्रीहीन तो पहले ही हो गया था, अब मणि और ब्रह्मतेजसे भी रहित हो गया। इसके बाद उन्होंने रस्सीका बन्धन खोलकर उसे शिविरसे निकाल दिया॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 112) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/56/