इसके बाद अपने मित्र और सारथि श्रीकृष्णके साथ वे अपने युद्ध-शिविरमें पहुँचे। वहाँ अपने मृत पुत्रोंके लिये शोक करती हुई द्रौपदीको उसे सौंप दिया ॥ ४१॥
अथोपेत्य स्वशिबिरं गोविन्दप्रियसारथिः।
न्यवेदयत्तं प्रियायै शोचन्त्या आत्मजान् हतान्॥ ४१
इसके बाद अपने मित्र और सारथि श्रीकृष्णके साथ वे अपने युद्ध-शिविरमें पहुँचे। वहाँ अपने मृत पुत्रोंके लिये शोक करती हुई द्रौपदीको उसे सौंप दिया ॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 111) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/41/