किसी भी दूसरे अस्त्रमें इसको दबा देनेकी शक्ति नहीं है। तुम शस्त्रास्त्रविद्याको भलीभाँति जानते ही हो, ब्रह्मास्त्रके तेजसे ही इस ब्रह्मास्त्रकी प्रचण्ड आगको बुझा दो॥ २८॥✎ 65
न ह्यस्यान्यतमं किञ्चिदस्त्रं प्रत्यवकर्शनम्।
जह्यस्त्रतेज उन्नद्धमस्त्रज्ञो ह्यस्त्रतेजसा॥ २८
किसी भी दूसरे अस्त्रमें इसको दबा देनेकी शक्ति नहीं है। तुम शस्त्रास्त्रविद्याको भलीभाँति जानते ही हो, ब्रह्मास्त्रके तेजसे ही इस ब्रह्मास्त्रकी प्रचण्ड आगको बुझा दो॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 110) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)