भगवान्ने कहा—अर्जुन! यह अश्वत्थामाका चलाया हुआ ब्रह्मास्त्र है। यह बात समझ लो कि प्राणसंकट उपस्थित होनेसे उसने इसका प्रयोग तो कर दिया है, परन्तु वह इस अस्त्रको लौटाना नहीं जानता॥ २७॥✎ 65
वेत्थेदं द्रोणपुत्रस्य ब्राह्ममस्त्रं प्रदर्शितम्।
नैवासौ वेद संहारं प्राणबाध उपस्थिते॥ २७
भगवान्ने कहा—अर्जुन! यह अश्वत्थामाका चलाया हुआ ब्रह्मास्त्र है। यह बात समझ लो कि प्राणसंकट उपस्थित होनेसे उसने इसका प्रयोग तो कर दिया है, परन्तु वह इस अस्त्रको लौटाना नहीं जानता॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 109) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)