श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.27

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

वेत्थेदं द्रोणपुत्रस्य ब्राह्ममस्त्रं प्रदर्शितम्।

नैवासौ वेद संहारं प्राणबाध उपस्थिते॥ २७

vetthedaṃ droṇaputrasya brāhmamastraṃ pradarśitam|

naivāsau veda saṃhāraṃ prāṇabādha upasthite|| 27

अर्थ

भगवान्‌ने कहा—अर्जुन! यह अश्‍वत्थामाका चलाया हुआ ब्रह्मास्त्र है। यह बात समझ लो कि प्राणसंकट उपस्थित होनेसे उसने इसका प्रयोग तो कर दिया है, परन्तु वह इस अस्त्रको लौटाना नहीं जानता॥ २७॥✎ 65

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #65 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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