श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

स एव जीवलोकस्य मायामोहितचेतसः।

विधत्से स्वेन वीर्येण श्रेयो धर्मादिलक्षणम्॥ २४

sa eva jīvalokasya māyāmohitacetasaḥ|

vidhatse svena vīryeṇa śreyo dharmādilakṣaṇam|| 24

अर्थ

वही तुम अपने प्रभावसे माया-मोहित जीवोंके लिये धर्मादिरूप कल्याणका विधान करते हो॥ २४॥

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