श्रीसूतजीने कहा—ब्रह्मनदी सरस्वतीके पश्चिम तटपर शम्याप्रास नामका एक आश्रम है। वहाँ ऋषियोंके यज्ञ चलते ही रहते हैं॥ २॥✎ 1573
ब्रह्मनद्यां सरस्वत्यामाश्रमः पश्चिमे तटे।
शम्याप्रास इति प्रोक्त ऋषीणां सत्रवर्धनः॥ २
श्रीसूतजीने कहा—ब्रह्मनदी सरस्वतीके पश्चिम तटपर शम्याप्रास नामका एक आश्रम है। वहाँ ऋषियोंके यज्ञ चलते ही रहते हैं॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 107) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)