श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

माता शिशूनां निधनं सुतानां निशम्य घोरं परितप्यमाना।

तदारुदद‍्बाष्पकलाकुलाक्षी तां सान्त्वयन्‍नाह किरीटमाली॥ १५

mātā śiśūnāṃ nidhanaṃ sutānāṃ niśamya ghoraṃ paritapyamānā|

tadārudadbāṣpakalākulākṣī tāṃ sāntvayannāha kirīṭamālī|| 15

अर्थ

उन बालकोंकी माता द्रौपदी अपने पुत्रोंका निधन सुनकर अत्यन्त दुःखी हो गयी। उसकी आँखोंमें आँसू छलछला आये—वह रोने लगी। अर्जुनने उसे सान्त्वना देते हुए कहा॥ १५॥

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