उन बालकोंकी माता द्रौपदी अपने पुत्रोंका निधन सुनकर अत्यन्त दुःखी हो गयी। उसकी आँखोंमें आँसू छलछला आये—वह रोने लगी। अर्जुनने उसे सान्त्वना देते हुए कहा॥ १५॥
माता शिशूनां निधनं सुतानां निशम्य घोरं परितप्यमाना।
तदारुदद्बाष्पकलाकुलाक्षी तां सान्त्वयन्नाह किरीटमाली॥ १५
उन बालकोंकी माता द्रौपदी अपने पुत्रोंका निधन सुनकर अत्यन्त दुःखी हो गयी। उसकी आँखोंमें आँसू छलछला आये—वह रोने लगी। अर्जुनने उसे सान्त्वना देते हुए कहा॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 108) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/15/