मुझे प्राप्त करनेका तुम्हारा यह दृढ़ निश्चय कभी किसी प्रकार नहीं टूटेगा। समस्त सृष्टिका प्रलय हो जानेपर भी मेरी कृपासे तुम्हें मेरी स्मृति बनी रहेगी’॥ २५॥✎ 555657
मतिर्मयि निबद्धेयं न विपद्येत कर्हिचित्।
प्रजासर्गनिरोधेऽपि स्मृतिश्च मदनुग्रहात्॥ २५
मुझे प्राप्त करनेका तुम्हारा यह दृढ़ निश्चय कभी किसी प्रकार नहीं टूटेगा। समस्त सृष्टिका प्रलय हो जानेपर भी मेरी कृपासे तुम्हें मेरी स्मृति बनी रहेगी’॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 105) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)