॥ श्रीहरिः ॥
भिक्षुभिर्विप्रवसिते विज्ञानादेष्टृभिस्तव।
वर्तमानो वयस्याद्ये ततः किमकरोद्भवान्॥ २
bhikṣubhirvipravasite vijñānādeṣṭṛbhistava|
vartamāno vayasyādye tataḥ kimakarodbhavān|| 2
अर्थ
श्रीव्यासजीने पूछा—नारदजी! जब आपको ज्ञानोपदेश करनेवाले महात्मागण चले गये, तब आपने क्या किया? उस समय तो आपकी अवस्था बहुत छोटी थी॥ २॥
भिक्षुभिर्विप्रवसिते विज्ञानादेष्टृभिस्तव।
वर्तमानो वयस्याद्ये ततः किमकरोद्भवान्॥ २
श्रीव्यासजीने पूछा—नारदजी! जब आपको ज्ञानोपदेश करनेवाले महात्मागण चले गये, तब आपने क्या किया? उस समय तो आपकी अवस्था बहुत छोटी थी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 102) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/2/