श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.29

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

भारतव्यपदेशेन ह्याम्नायार्थश्‍च दर्शितः।

दृश्यते यत्र धर्मादि स्त्रीशूद्रादिभिरप्युत॥ २९

bhāratavyapadeśena hyāmnāyārthaśca darśitaḥ|

dṛśyate yatra dharmādi strīśūdrādibhirapyuta|| 29

अर्थ

महाभारतकी रचनाके बहाने मैंने वेदके अर्थको खोल दिया है—जिससे स्त्री, शूद्र आदि भी अपने-अपने धर्म-कर्मका ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं॥ २९॥✎ 36 37 38 39

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #36 शब्दोंके बीचका स्थान: कोभी → को भी
  • #37 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #38 शब्दोंके बीचका स्थान: कोप्राप्त → को प्राप्त
  • #39 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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