श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तत्सर्वं नः समाचक्ष्व पृष्टो यदिह किञ्चन।

मन्ये त्वां विषये वाचां स्नातमन्यत्र छान्दसात्॥ १३

tatsarvaṃ naḥ samācakṣva pṛṣṭo yadiha kiñcana|

manye tvāṃ viṣaye vācāṃ snātamanyatra chāndasāt|| 13

अर्थ

वेदवाणीको छोड़कर अन्य समस्त शास्त्रोंके आप पारदर्शी विद्वान् हैं। सूतजी! इसलिये इस समय जो कुछ हमने आपसे पूछा है, वह सब कृपा करके हमें कहिये॥ १३॥✎ 1278 1279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
  • #1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने

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