श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.29

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

जन्म गुह्यं भगवतो य एतत्प्रयतो नरः।

सायं प्रातर्गृणन् भक्‍त्या दुःखग्रामाद्विमुच्यते॥ २९

janma guhyaṃ bhagavato ya etatprayato naraḥ|

sāyaṃ prātargṛṇan bhaktyā duḥkhagrāmādvimucyate|| 29

अर्थ

भगवान्‌के दिव्य जन्मोंकी यह कथा अत्यन्त गोपनीय—रहस्यमयी है; जो मनुष्य एकाग्रचित्तसे नियमपूर्वक सायंकाल और प्रातःकाल प्रेमसे इसका पाठ करता है, वह सब दुःखोंसे छूट जाता है॥ २९॥

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