श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अवतारे षोडशमे पश्यन् ब्रह्मद्रुहो नृपान्।

त्रिःसप्तकृत्वः कुपितो निःक्षत्रामकरोन्महीम्॥ २०

avatāre ṣoḍaśame paśyan brahmadruho nṛpān|

triḥsaptakṛtvaḥ kupito niḥkṣatrāmakaronmahīm|| 20

अर्थ

सोलहवें परशुराम अवतारमें जब उन्होंने देखा कि राजालोग ब्राह्मणोंके द्रोही हो गये हैं, तब क्रोधित होकर उन्होंने पृथ्वीको इक्कीस बार क्षत्रियोंसे शून्य कर दिया॥ २०॥✎ 30 31

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #30 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #31 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें