पंद्रहवीं बार वामनका रूप धारण करके भगवान् दैत्यराज बलिके यज्ञमें गये। वे चाहते तो थे त्रिलोकीका राज्य, परन्तु माँगी उन्होंने केवल तीन पग पृथ्वी॥ १९॥✎ 3031
पञ्चदशं वामनकं कृत्वागादध्वरं बलेः।
पदत्रयं याचमानः प्रत्यादित्सुस्त्रिविष्टपम्॥ १९
पंद्रहवीं बार वामनका रूप धारण करके भगवान् दैत्यराज बलिके यज्ञमें गये। वे चाहते तो थे त्रिलोकीका राज्य, परन्तु माँगी उन्होंने केवल तीन पग पृथ्वी॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 90) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)