जिस समय देवता और दैत्य समुद्र-मन्थन कर रहे थे, उस समय ग्यारहवाँ अवतार धारण करके कच्छपरूपसे भगवान्ने मन्दराचलको अपनी पीठपर धारण किया॥ १६॥✎ 3031
सुरासुराणामुदधिं मथ्नतां मन्दराचलम्।
दध्रे कमठरूपेण पृष्ठ एकादशे विभुः॥ १६
जिस समय देवता और दैत्य समुद्र-मन्थन कर रहे थे, उस समय ग्यारहवाँ अवतार धारण करके कच्छपरूपसे भगवान्ने मन्दराचलको अपनी पीठपर धारण किया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 90) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)