श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.21

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

सर्वे वयं तावदिहास्महेऽद्य

कलेवरं यावदसौ विहाय।

लोकं परं विरजस्कं विशोकं

यास्यत्ययं भागवतप्रधानः॥ २१

sarve vayaṃ tāvadihāsmahe'dya

kalevaraṃ yāvadasau vihāya|

lokaṃ paraṃ virajaskaṃ viśokaṃ

yāsyatyayaṃ bhāgavatapradhānaḥ|| 21

अर्थ

हम सब तबतक यहीं रहेंगे, जबतक ये भगवान्‌के परम भक्त परीक्षित् अपने नश्‍वर शरीरको छोड़कर मायादोष एवं शोकसे रहित भगवद्धाममें नहीं चले जाते’॥ २१॥

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