॥ श्रीहरिः ॥
उपवर्णितमेतद् वः३ पुण्यं पारीक्षितं मया।
वासुदेवकथोपेतमाख्यानं यदपृच्छत॥ ९
upavarṇitametad vaḥ puṇyaṃ pārīkṣitaṃ mayā|
vāsudevakathopetamākhyānaṃ yadapṛcchata|| 9
अर्थ
शौनकादि ऋषियो! आपलोगोंको मैंने भगवान्की कथासे युक्त राजा परीक्षित्का पवित्र चरित्र सुनाया। आपलोगोंने यही पूछा था॥ ९॥✎ 109
उपवर्णितमेतद् वः पुण्यं पारीक्षितं मया।
वासुदेवकथोपेतमाख्यानं यदपृच्छत॥ ९
शौनकादि ऋषियो! आपलोगोंको मैंने भगवान्की कथासे युक्त राजा परीक्षित्का पवित्र चरित्र सुनाया। आपलोगोंने यही पूछा था॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 169) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/9/टिप्पणियाँ
- ३
प्रा० पा०—मेतद्धि।
(मुद्रित पृष्ठ 169)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #109 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की