श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.6

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

यस्मिन्‍नहनि यर्ह्येव भगवानुत्ससर्ज गाम्।

तदैवेहानुवृत्तोऽसावधर्मप्रभवः कलिः॥ ६

yasminnahani yarhyeva bhagavānutsasarja gām|

tadaivehānuvṛtto'sāvadharmaprabhavaḥ kaliḥ|| 6

अर्थ

वैसे तो जिस दिन, जिस क्षण श्रीकृष्णने पृथ्वीका परित्याग किया, उसी समय पृथ्वीमें अधर्मका मूलकारण कलियुग आ गया था॥ ६॥✎ 109

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #109 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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