श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.38

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

ततोऽभ्येत्याश्रमं बालो गले सर्पकलेवरम्।

पितरं वीक्ष्य दुःखार्तो मुक्तकण्ठो रुरोद ह॥ ३८

tato'bhyetyāśramaṃ bālo gale sarpakalevaram|

pitaraṃ vīkṣya duḥkhārto muktakaṇṭho ruroda ha|| 38

अर्थ

इसके बाद वह बालक अपने आश्रमपर आया और अपने पिताके गलेमें साँप देखकर उसे बड़ा दुःख हुआ तथा वह ढाड़ मारकर रोने लगा ॥ ३८॥

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