॥ श्रीहरिः ॥
इति६ लङ्घितमर्यादं तक्षकः सप्तमेऽहनि।
दङ्क्ष्यति स्म कुलाङ्गारं चोदितो मे ततद्रुहम्७॥ ३७
iti laṅghitamaryādaṃ takṣakaḥ saptame'hani|
daṅkṣyati sma kulāṅgāraṃ codito me tatadruham|| 37
अर्थ
‘कुलांगार परीक्षित्ने मेरे पिताका अपमान करके मर्यादाका उल्लंघन किया है, इसलिये मेरी प्रेरणासे आजके सातवें दिन उसे तक्षक सर्प डस लेगा’॥ ३७॥
इति लङ्घितमर्यादं तक्षकः सप्तमेऽहनि।
दङ्क्ष्यति स्म कुलाङ्गारं चोदितो मे ततद्रुहम्॥ ३७
‘कुलांगार परीक्षित्ने मेरे पिताका अपमान करके मर्यादाका उल्लंघन किया है, इसलिये मेरी प्रेरणासे आजके सातवें दिन उसे तक्षक सर्प डस लेगा’॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 172) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/37/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—अतो।
(मुद्रित पृष्ठ 172) - ७
प्रा० पा०—पितृद्रुहम्।
(मुद्रित पृष्ठ 172)