श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.44

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

आस्तेऽधुना स राजर्षिः कौरवेन्द्रश्रियोल्लसन्।

गजाह्वये महाभागश्‍चक्रवर्ती बृहच्छ्रवाः॥ ४४

āste'dhunā sa rājarṣiḥ kauravendraśriyollasan|

gajāhvaye mahābhāgaścakravartī bṛhacchravāḥ|| 44

अर्थ

वे परम यशस्वी सौभाग्यभाजन चक्रवर्ती सम्राट् राजर्षि परीक्षित् इस समय हस्तिनापुरमें कौरव-कुलकी राज्यलक्ष्मीसे शोभायमान हैं॥ ४४॥

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