श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.37

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तन्मे धर्मभृतां श्रेष्ठ स्थानं निर्देष्टुमर्हसि।

यत्रैव नियतो वत्स्य आतिष्ठंस्तेऽनुशासनम्॥ ३७

tanme dharmabhṛtāṃ śreṣṭha sthānaṃ nirdeṣṭumarhasi|

yatraiva niyato vatsya ātiṣṭhaṃste'nuśāsanam|| 37

अर्थ

धार्मिकशिरोमणे! आप मुझे वह स्थान बतलाइये, जहाँ मैं आपकी आज्ञाका पालन करता हुआ स्थिर होकर रह सकूँ ॥ ३७॥

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