श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

आजहाराश्‍वमेधांस्त्रीन् गङ्गायां भूरिदक्षिणान्।

शारद्वतं गुरुं कृत्वा देवा यत्राक्षिगोचराः॥ ३

ājahārāśvamedhāṃstrīn gaṅgāyāṃ bhūridakṣiṇān|

śāradvataṃ guruṃ kṛtvā devā yatrākṣigocarāḥ|| 3

अर्थ

तथा कृपाचार्यको आचार्य बनाकर उन्होंने गंगाके तटपर तीन अश्‍वमेधयज्ञ किये, जिनमें ब्राह्मणोंको पुष्कल दक्षिणा दी गयी। उन यज्ञोंमें देवताओंने प्रत्यक्षरूपमें प्रकट होकर अपना भाग ग्रहण किया था॥ ३॥

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