श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.21

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अरक्ष्यमाणाः स्त्रिय उर्वि बालान्

शोचस्यथो पुरुषादैरिवार्तान्।

वाचं देवीं ब्रह्मकुले कुकर्म-

ण्यब्रह्मण्ये राजकुले कुलाग्र्यान्॥ २१

arakṣyamāṇāḥ striya urvi bālān

śocasyatho puruṣādairivārtān|

vācaṃ devīṃ brahmakule kukarma-

ṇyabrahmaṇye rājakule kulāgryān|| 21

अर्थ

देवि! क्या तुम राक्षस-सरीखे मनुष्योंके द्वारा सतायी हुई अरक्षित स्त्रियों एवं आर्तबालकोंके लिये शोक कर रही हो? सम्भव है, विद्या अब कुकर्मी-ब्राह्मणोंके चंगुलमें पड़ गयी है और ब्राह्मण विप्रद्रोही राजाओंकी सेवा करने लगे हैं, और इसीका तुम्हें दुःख हो॥ २१॥

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