श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.38

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यद‍्बाहुदण्डाभ्युदयानुजीविनो यदुप्रवीरा ह्यकुतोभया मुहुः।

अधिक्रमन्त्यङ्‌घ्रिभिराहृतां बलात् सभां सुधर्मां सुरसत्तमोचिताम्॥ ३८

yadbāhudaṇḍābhyudayānujīvino yadupravīrā hyakutobhayā muhuḥ|

adhikramantyaṅghribhirāhṛtāṃ balāt sabhāṃ sudharmāṃ surasattamocitām|| 38

अर्थ

यदुवंशी वीर श्रीकृष्णके बाहुदण्डके प्रभावसे सुरक्षित रहकर निर्भय रहते हैं और बलपूर्वक लायी हुई बड़े-बड़े देवताओंके बैठने योग्य सुधर्मा सभाको अपने चरणोंसे आक्रान्त करते हैं॥ ३८॥

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