श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

व्यतीताः कतिचिन्मासास्तदा ना२यात्ततोऽर्जुनः।

ददर्श घोररूपाणि निमित्तानि कुरूद्वहः३॥ २

vyatītāḥ katicinmāsāstadā nāyāttato'rjunaḥ|

dadarśa ghorarūpāṇi nimittāni kurūdvahaḥ|| 2

अर्थ

कई महीने बीत जानेपर भी अर्जुन वहाँसे लौटकर नहीं आये। धर्मराज युधिष्ठिरको बड़े भयंकर अपशकुन दीखने लगे॥ २॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—पाण्डुसुतो नृपः।

    (मुद्रित पृष्ठ 146)
  2. ३

    प्रा० पा०—भृगूद्वह।

    (मुद्रित पृष्ठ 146)

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