॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.13.50
धृतराष्ट्रः सह भ्रात्रा गान्धार्या च स्वभार्यया।
दक्षिणेन हिमवत ऋषीणामाश्रमं गतः॥ ५०
dhṛtarāṣṭraḥ saha bhrātrā gāndhāryā ca svabhāryayā|
dakṣiṇena himavata ṛṣīṇāmāśramaṃ gataḥ|| 50
अर्थ
धर्मराज! हिमालयके दक्षिण भागमें, जहाँ सप्तर्षियोंकी प्रसन्नताके लिये गंगाजीने अलग-अलग सात धाराओंके रूपमें अपनेको सात भागोंमें विभक्त कर दिया है, जिसे ‘सप्तस्रोत’ कहते हैं, वहीं ऋषियोंके आश्रमपर धृतराष्ट्र अपनी पत्नी गान्धारी और विदुरके साथ गये हैं॥ ५०-५१॥