श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.49

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

निष्पादितं देवकृत्यमवशेषं प्रतीक्षते।

तावद् यूयमवेक्षध्वं भवेद् यावदिहेश्‍वरः॥ ४९

niṣpāditaṃ devakṛtyamavaśeṣaṃ pratīkṣate|

tāvad yūyamavekṣadhvaṃ bhaved yāvadiheśvaraḥ|| 49

अर्थ

अब वे देवताओंका कार्य पूरा कर चुके हैं। थोड़ा-सा काम और शेष है, उसीके लिये वे रुके हुए हैं। जबतक वे प्रभु यहाँ हैं तबतक तुमलोग भी उनकी प्रतीक्षा करते रहो॥ ४९॥✎ 91

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #91 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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