श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.28

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

एवं राजा विदुरेणानुजेन प्रज्ञाचक्षुर्बोधित आजमीढः।

छित्त्वा स्वेषु स्नेहपाशान्द्रढिम्नो निश्‍चक्राम भ्रातृसंदर्शिताध्वा॥ २८

evaṃ rājā vidureṇānujena prajñācakṣurbodhita ājamīḍhaḥ|

chittvā sveṣu snehapāśāndraḍhimno niścakrāma bhrātṛsaṃdarśitādhvā|| 28

अर्थ

जब छोटे भाई विदुरने अंधे राजा धृतराष्ट्रको इस प्रकार समझाया, तब उनकी प्रज्ञाके नेत्र खुल गये; वे भाई-बन्धुओंके सुदृढ़ स्नेह-पाशोंको काटकर अपने छोटे भाई विदुरके दिखलाये हुए मार्गसे निकल पड़े॥ २८॥

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