श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

एष दाता शरण्यश्‍च यथा ह्यौशीनरः शिबिः।

य५शो वितनिता स्वानां दौष्यन्तिरिव यज्वनाम्॥ २०

eṣa dātā śaraṇyaśca yathā hyauśīnaraḥ śibiḥ|

yaśo vitanitā svānāṃ dauṣyantiriva yajvanām|| 20

अर्थ

यह उशीनरनरेश शिबिके समान दाता और शरणागतवत्सल होगा तथा याज्ञिकोंमें दुष्यन्तके पुत्र भरतके समान अपने वंशका यश फैलायेगा॥ २०॥✎ 86

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—यथोचितविधाता च दौष्यन्ति।

    (मुद्रित पृष्ठ 137)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #86 शब्दोंके बीचका स्थान: होगा॥१९॥ → होगा॥ १९॥

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