vidhamantaṃ saṃnikarṣe paryaikṣata ka ityasau|| 10
अर्थ
जैसे सूर्य अपनी किरणोंसे कुहरेको भगा देते हैं, वैसे ही वह उस गदाके द्वारा ब्रह्मास्त्रके तेजको शान्त करता जा रहा था। उस पुरुषको अपने समीप देखकर वह गर्भस्थ शिशु सोचने लगा कि यह कौन है॥ १०॥
अस्त्रतेजः स्वगदया नीहारमिव गोपतिः।
विधमन्तं संनिकर्षे पर्यैक्षत क इत्यसौ॥ १०
जैसे सूर्य अपनी किरणोंसे कुहरेको भगा देते हैं, वैसे ही वह उस गदाके द्वारा ब्रह्मास्त्रके तेजको शान्त करता जा रहा था। उस पुरुषको अपने समीप देखकर वह गर्भस्थ शिशु सोचने लगा कि यह कौन है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 136) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/10/