श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अथाविशत् स्वभवनं सर्वकाममनुत्तमम्।

प्रासादा यत्र पत्नीनां सहस्राणि च षोडश॥ ३०

athāviśat svabhavanaṃ sarvakāmamanuttamam|

prāsādā yatra patnīnāṃ sahasrāṇi ca ṣoḍaśa|| 30

अर्थ

माताओंसे आज्ञा लेकर वे अपने समस्त भोग-सामग्रियोंसे सम्पन्‍न सर्वश्रेष्ठ भवनमें गये। उसमें सोलह हजार पत्नियोंके अलग-अलग महल थे॥ ३०॥

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