श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तमुपश्रुत्य निनदं जगद्भयभयावहम्।

प्रत्युद्ययुः प्रजाः सर्वा भर्तृदर्शनलालसाः॥ ३

tamupaśrutya ninadaṃ jagadbhayabhayāvaham|

pratyudyayuḥ prajāḥ sarvā bhartṛdarśanalālasāḥ|| 3

अर्थ

भगवान्‌के शंखकी वह ध्वनि संसारके भयको भयभीत करनेवाली है। उसे सुनकर सारी प्रजा अपने स्वामी श्रीकृष्णके दर्शनकी लालसासे नगरके बाहर निकल आयी॥ ३॥

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